ऍसे ही बढ़ेंगी बेटियां।

गांव में ऍसी बहुत सी लड़िकय़ां हैं जो या तो कभी स्कूल नही गई या कभी गई भी ते कुछ ही क्लास के बाद स्कूल से निकलवा दिया गया। चूला चौखा संभालना, घर का काम करना इससे आगे उन्हें कभी बढ़ने का मौका न मिला और न दिया गया। कईं लड़कियों की तो नाबालिक उम्र में ब्याह भी करा दिया गया। लेकिन पिछले कुछ सालों में गांव के लोगों की सोच में कुछ अलग देखने को मिलता है। लड़की पेदा होने पर वह खुश तो आज भी नहीं होते लेकिन समाज के डर से बिटिया को स्कूल जरूर भेज देते हैं। साथ ही चूला चौखे के अलावा थोड़ा बहुत बाहर का काम भी करने की इजाजद दे देते हैं।

उत्तरकाशी के चिन्याली सौड़ ब्ल्राक में एक छोटी सी जगह है नागनी। विंग्स आफॅ होप द हैल्पिंग हैंड सोसाइटी पिछले करीब एक साल से यहां होप सेंटर चला रहा है। इस होप सेंटर में छह महीनों तक सिलाई कढ़ाई मुफ्त में सिखाई जाती है। एक बैच में छह लड़कियों को रखा जाता है। यह वह लड़कियां हैं जो कभी स्कूल नहीं गई या अगर गई भी तो उन्हें स्कूल से निकलवा दिया गया। इस सेंटर की देख रेख मैं (संगीता) करती हूं मैंने हालही में आईटीआई की पढाई पूरी करी है। अब मैं अपने बच्चों और घर के साथ साथ होप सेंटर भी चलाती हैं।

सोसाइटी ने होप सेंटर चला के गांव की लड़कियों का रुझान सिलाई कढ़ाई की ओर किया है। जो लड़कियां पढ़ लिख नहीं सकती वह यहां काम सीखती हैं, और अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश करती हैं।पिछले बैच की एक लड़की बिंदु कलूड़ा ने यहां से काम सीखने के बाद गांव के लोगों के कपड़े सिलने भी शुरू करें है।

इन लड़कियों को काम सीखते और सिखाते देख जितनी खुशी होती है उससे भी ज्यादा खुशी इस बात की होती है कि मुझे संस्था ने अपने साथ जोड़ा। अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं अपना खर्चा खुद नकाल रही हूं। छोटे मोटे खर्चों के लिए अब पति से पैसे नहीं मांगने पड़ते। अगर इसी तरह के काम गांव में होते रहेंगें तो इससे लड़कियां प्रबल तो होंगी ही साथ ही साथ ही गांव में रोजगार के साधन भी बढेंगें।

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